मै मानसी, एक अनंत असाधारण कल्पना
अरविन्द पाण्डेय जी की परा वाणी पर कविता पढ़ी । बड़ी अच्छी शैली है । नारी पर उनकी कविता " मै नारी हूँ , नर को मैंने ही जन्म दिया " ने मुझे प्रेरित किया की मैं इस विषय पर अपनी ४ पंक्तियाँ जोड़ दूँ । प्रस्तुत है वो ४ पंक्तियाँ ..., अरविन्द जी को आभार सहित...
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राकेश
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[28 May 2009 22:08 PM]



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