ईदगाह
ईदगाह ( मुशी प्रेमचंद की कहानी ' ईदगाह ' पर आधारित ) हामिद था एक अच्छा बेटा अपनी माँ का प्यारा , बूढी आमना की धुंधली आंखों का तारा , गाँव में जब मेला था पाक ईद के मौके पर , लगी हुई थी खालिदा , रोटी में चूल्हे चौके पर , पोता मेरा खाना खाकर मेले में फि...
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kavitaprayas
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[02 Sep 2008 16:27 PM]



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