गंगा मौसी
किसी देश में नदी किनारे , था मेरा एक गाँव, धेनु, धरा , धन, धाम प्रचुर था, थी पीपल की छाँव, उसी गाँव में मेरी प्यारी गंगा मौसी रहती थी, था कोई न रिश्ता उनसे, यूँ ही मौसी कहती थी , हर गर्मी में गाँव जो जाती मैं उनसे ही खेली थी, मैं थी नौ की, बीस की वो...
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kavitaprayas
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[05 Sep 2008 19:02 PM]



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