छोटी छोटी बातों की है यादें बड़ी !-मौसी_सीरीज़-१

ek kahani - aav, bhaav aur prabhaav ki ! बड़ी खलबली मची है | हर तरफ़ कुछ न कुछ बिखरा है .. किसी का शर्ट प्रेस नहीं है तो किसी की बिंदी नहीं मिल रही | कभी कोई बच्चा रो रहा है तो किसी ओर हँसी के ठहाके सुने दे रहे हैं | बिल्कुल इंडिया की तरह लग रहा है | आज घर - एक घर की तरह लग रहा है .... पर मौ... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
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[10 Oct 2008 14:12 PM]

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