फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी !-मौसी_सीरीज़-२

ek kahani - aav, bhaav aur prabhaav ki ! क्या करें मौसी ? आधे घंटे से पार्किंग ही नहीं मिल रही , उधर सगाई का मुहूर्त निकला जा रहा है ," मैंने बड़ी कातरता से पूछा| "ये मुआ पार्किंग -शार्किंग तो अपने यहाँ नहीं होता | तेरे मौसाजी तो जहाँ कहीं गाडी खड़ी कर देते हैं और हम तो ऐसे ही चल देते हैं | य... [पूरी पोस्ट]
writer kavitaprayas
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[10 Oct 2008 14:13 PM]

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