शत्रु का मुख मोड़ना भी जानते हैं

Snehanchal हम अहिंसा के पुजारी हैं मगर अवसर पड़े तो; शस्त्र लेकर शत्रु का मुख मोड़ना भी जानते हैं। मन-कलश से प्रेम का पीयुष छलकता है सदा पर; विष भरी गागर घृणा की फोड़ना भी जानते हैं। धर्म को माना नहीं है राष्ट्र का आधार हमने; विश्व को बाँटा सदा ही प्यार का उपहा... [पूरी पोस्ट]
writer Hemant Snehi
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[17 Jul 2008 14:39 PM]

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