आप से आंखें हमारी लड़ गईं

Snehanchal आप से आंखें हमारी लड़ गईं; दिन हुए छोटे कि रातें बढ़ गईं। ज़िदगी की ओढ़नी पर प्रेम की; बूटियां कितनी न जाने कढ़ गईं। खिल उठी मन की कली मधुमास में; पत्तियां सूखी हुई सब झड़ गईं। ज़िंदगी में आप की परछाइयां; इंद्रधनुषी चित्र कोई जड़ गईं। अब न आंखों को ल... [पूरी पोस्ट]
writer Hemant Snehi
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[17 Sep 2008 14:13 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix