एक अमूल्य उपहार

Snehanchal सुबह-सुबह उठा ही था। आदत के मुताबिक ड्राइंग रूम में आकर बैठा और अखबार उठा कर देखने लगा। तभी दोनों पुत्र और पुत्र वधुएं आए और जन्मदिन की बधाई देने लगे। साथ में दोनों पौत्र और पौत्री भी थे। चूँकि औपचारिक तौर पर अपना जन्मदिन कभी मनाया नहीं, इसलिए जन्मति... [पूरी पोस्ट]
writer Hemant Snehi
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[01 Oct 2008 14:27 PM]

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