वर्ष, महीने और दिन
वर्ष, महीने और दिन, सदियाँ और पल-छिन, आते हैं और जाते हैं, बहुत कुछ हम पाते हैं, लेकिन, सब कुछ है बेकार, न मिले यदि अपनों का प्यार। सह सकते हैं हम हर अभाव, बस, न मिले किसी सम्बन्ध के टूटने का घाव। -हेमन्त 'स्नेही' *...
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Hemant Snehi
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[03 Aug 2009 00:26 AM]



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