साहित्य का उद्देश्य

जनचेतना जब तक साहित्य का काम केवल मनबहलाव का सामान जुटाना, केवल लोरियां गा-गाकर सुलाना, केवल आंसू बहाकर जी हल्का करना था, तब तक इसके लिए कर्म की आवश्यकता न थी। वह एक दीवाना था, जिसका ग़म दूसरे खाते थे, मगर हम साहित्य को केवल मनोरंजन और विलासिता की वस्तु नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer Sankalp
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[27 Jan 2008 06:58 AM]

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