'तीन टके का उपन्यास'
तीन टके का उपन्यास' में ब्रेष्ट पतनशील पूंजीवादी समाज में व्यापरिक पूंजीपति वर्ग की घोर अनैतिकता, लालच और उसके ''राष्ट्रवाद'' की असलियत को एकदम उजागर कर देते हैं। ब्रेष्ट बहुत ही दिलचस्प और यथार्थवादी तरीके से पूंजीवादी राष्ट्रवाद, पूंजीवादी न...
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Sankalp
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[11 Sep 2008 02:54 AM]



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