स्वांतः सुखाय...
बहुत दिन पहले की बात है जब हमने भी अपना एक ब्लाग बनाया.सोचा जब भी मैं कहीं कुछ नहीं कह पाउँगा,ब्लाग पर कहूंगा. कहने को बहुत कुछ था मेरे पास लेकिन, मैं ये सोचता था कि पढेगा कौन? साथ में कस्बे वाले रविश कुमार की तरह मुझे भी लिखने से ज्यादा मह्त्वपूर्ण...
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अनिल दुबे
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[29 Nov 2007 09:00 AM]



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