घर भी छूटे और घाट भी !

घुमक्कड़ मुहल्ले में जाति के उपर चल रही बहस के बीच में मैने भी कुछ कहा था एक पत्र के माध्यम से. इसके बाद दिलीप भाई ने उस पत्र क जवाब भी दिया.उस पर मुझे कुछ कहना था. मैने उसे सीधे अविनाश दादा के पास भेज दिया. हालांकि उन्होनें उसे पोस्ट तो नहीं किया हां मोहल्ले... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल दुबे
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[11 Dec 2007 05:43 AM]

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