हम और तुम !
तुम मेरे दिल की रानी हो मैं तेरे दिल का कचरा हूँ पति ढूँढा है लक्ष्मीवाहन तुम हो देवी सौभाग्यवती तुम हो खिचडी में घी जैसी मैं चटनी जैसा दिखता हूँ मैं हूँ कैसा नादान प्रिये कैसे समझाऊँ प्यार प्रिये तुम हो बिल्कुल जीनत अमान मैं प्राण सरीखा दिखता हूँ तु...
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सतीश सक्सेना
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[27 May 2008 22:40 PM]



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