कविता लेखन
देवी जी ने मूड बनाया कविता लिखतीं कचरे पे ! कागज कलम उठा कर उसने करी चढाई कचरे पे चार दिनों से यारो घर में भोजन बनता कचरे सा कविता बने यथार्थ वादी, घर को बदला कचरे सा कचरे-वालों को बुलवाने बेटा भेजा कचरे पर ! इंटरव्यू देने को आए सड़े भिखारी कचरे से !...
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सतीश सक्सेना
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[08 Jun 2008 13:11 PM]



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