दर्द दिया है तुमने मुझको दवा न तुमसे मांगूंगा !
समझ प्यार की नही जिन्हें है समझ नही मानवता की जिनकी अपनी ही इच्छाएँ तृप्त नही, हो पाती हैं ! दुनिया चाहे कुछ भी सोचे कभी न हाथ पसारूंगा ! विस्तृत ह्रदय मिला इश्वर से सारी दुनिया ही घर लगती प्यार नेह करुना और ममता मुझको दिए विधाता ने यह विशाल धनराशि प...
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सतीश सक्सेना
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[08 Oct 2008 00:14 AM]



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