यह भारत तो हमारा नही है !

जनमानस माफ़ करे, मै लगातार देख रहा हू कि सारी दुनिया को परिबार माननेवाला भारत ओंर पासायंन के रूप में विशव कल्याण कि कामना करने वाला महाराष्ट्र- दोनों को लेकर अब यह कहने का समय आ गया है कि हम एक परदेश एक देश के रूप में रहने में लगातार असफल हो रहे है,यह भारत त... [पूरी पोस्ट]
writer पिंटू कुमार

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[25 Oct 2008 03:22 AM]

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