लागे रज, बधे गज

विभूति-अनिमेष मिट्टी मिल गई तो मानो स्वर्ग मिल गया...कोई खिलौना, कोई दूसरा खेल, मिट्टी की बराबरी नहीं कर सकता ....उसके आगे टिक ही नहीं सकता। इसलिए मिट्टी में खेलने का कोई भी मौका हम छोड़ते ही नहीं हैं। ऊपर से मम्मा-पापा को कहते हुए भी सुन लिया, ' लागे रज, बधे गज'... [पूरी पोस्ट]
writer vibhuti-animesh
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[18 Dec 2008 21:33 PM]

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