गुस्ताव - एक कहानी (भाग- १)
दिमाग तो जैसे कहीं और ही खोया हुआ था, हाँ साईकिल जरूर सड़क पर ही चल रही थी, मानो अपने आप। रोशन के घर पहुंचकर उसके नए एसी की ठंडक में गपियाने का मजा - गुस्ताव मन ही मन पुराने लगभग मिलते जुलते अनुभवों से दो चार हो रहा था। साईकिल के पैडल अपने आप पड़ते जा...
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Rahul Singh
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[05 Aug 2009 13:34 PM]



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