गुस्ताव - एक कहानी (भाग- १)

In The Flux At Half Past Ten दिमाग तो जैसे कहीं और ही खोया हुआ था, हाँ साईकिल जरूर सड़क पर ही चल रही थी, मानो अपने आप। रोशन के घर पहुंचकर उसके नए एसी की ठंडक में गपियाने का मजा - गुस्ताव मन ही मन पुराने लगभग मिलते जुलते अनुभवों से दो चार हो रहा था। साईकिल के पैडल अपने आप पड़ते जा... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul Singh
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[05 Aug 2009 13:34 PM]

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