गुस्ताव - एक कहानी (भाग- २)

In The Flux At Half Past Ten गुस्ताव ने " नीड़ का निर्माण फिर" के पन्ने पलटना शुरू कर दिया। बाहर की गर्मी की अपेक्षा अंदर का ताप कम तो था ही, साथ ही साथ वातानुकूलन के कारण बड़ा ही सुकून पा रहा था वो उस कमरे में। आंखों के सामने रखी किताब को छोड़कर मन शायद कहीं और निकल चुका था। कि... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul Singh
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[16 Aug 2009 06:01 AM]

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