पहाडी समाज 1985-1986
मनुष्य एक सामाजिक पशु है। यह हमारी प्रवृति है की जहाँ हम जाते हैं या रहते हैं हम गुट बनाते है। जैसा की आ अब तक जान चुके है की हम लोग मीरा साहिब शिफ्ट हो चुके थे। चूँकि हमरे पिता जी सरकारी कर्मचारी थे उनका तबादला होता रहता थे। उनके ऑफिस में काफ...
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Gaurav Pandey
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[01 Nov 2009 16:24 PM]



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