किसकी बोली कितनी

विवेक के व्यंग व्यंग्य किसकी बोली कितनी विवके रंजन श्रीवास्तव एम.पी.एस.ई.बी. कालोनी, रामपुर, जबलपुर. अपने क्रिकेट के खिलाडी नीलाम हो गये, सबकी बढ चढ कर बोली लगाई गई . अच्छा हुआ, सब कुछ पारदर्षी तरीको से सबके सामने संपन्न हुआ, इस हम्माम में सब नंगे हैं. वरना बिकते त... [पूरी पोस्ट]
writer Vivek Ranjan Shrivastava
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[09 Dec 2008 14:46 PM]

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