विचार जड़ता के खिलाफ़ ज़ंग है- 1
मेरे वैचारिक गुरू... लेखन निरंतर चलने वाली प्रक्रिया का परिणाम है। लेखन की शुरुआत कब और कैसे की, का उत्तर देने के लिए बचपन के उन दिनों की याद को ताजा करना होगा, जब एक लेखक मन का जन्म हो रहा था। मोटे तौर पर मैं तेज विद्यार्थी नहीं था, लेकिन मेरे चाचा...
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राजू रंजन
अपना सफ़र
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[21 Nov 2008 02:00 AM]



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