लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा

कुछ यादें - अपनी सी लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा, दुम उठा के दौड़ा घोड़ा पहुँचा चौक में, चौक में था नाई घोड़े जी की नाई ने हजामत जो बनाई चग-बग चग-बग, चग-बग चग-बग घोड़ा पहुँचा चौक में..... दौड़ा दौड़ा दौड़ा घोड़ा, दु... [पूरी पोस्ट]
writer Rajeev Ranjan Lall
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[18 Oct 2006 09:50 AM]

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