लक्ष्य

कर्मवीर मैंने देखा सुबह-सुबह अपनी नन्ही सी बगिया में नन्हें से पौधे पर एक नन्हा सा फूल मुस्कुराता समां रखा था अपने अन्दर अनेक रंग, खुशियाँ और मुस्कान नन्हें जीवन-काल में भी गम न था मिट जाने का वह नन्हा सा कोमल सिखा रहा था हमें रखना लक्ष्य जीवन का बिखेरना मुस... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
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[20 Jun 2009 13:05 PM]

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