प्रौढ़ बचपन

कर्मवीर आते -जाते रास्ते पर मैंने देखा नन्हा सा एक प्रौढ़ बचपन नही था उसके जीवन में माता-पिता का प्यार -दुलार उठा रखा था उसने हाथों में अपने ही जैसा इक बचपन सिखा दिया था जीना उसको साल चार के इस जीवन में जूझ रहा था पर हिम्मत से लिए जिम्मेदारियों का बोझ स्वयं... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
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[17 Jun 2009 13:49 PM]

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