कल हो ना हो

कल हो ना हो यादों में कहीं न कहीं फिर बसता इतना दूर होकर भी पास है गाँव भूल के भी रह-रह कर याद आता है गाँव खेत पोखर ,नाहर भाखर नदी के किनारे गाँव चारो ओर सन्नाटा , शांति चाँद की शीतलता झींगुर के झर झर मेढक के टर्र टर्र के शोर में डूबा गाँव जिला-जवार, हुक्का-पानी... [पूरी पोस्ट]
writer mrityunjay kumar rai
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[29 Jun 2009 03:28 AM]

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