गीत हमने दो लिखे

कल हो ना हो गीत हमने दो लिखे विरह के, मिलन के एक गुनगुना न सका एक गीत गा न सका मीत तो मिले बहुत जिन्दगी के सफर में प्रीत भी जता न सका और प्यारा पा न सका जिन्दगी के पन्नें दो पढ़ लिए कभी कभी एक याद कर न सका एक को भुला न सका एक गुनगुना न सका एक गीत गा न सका (साभार... [पूरी पोस्ट]
writer mrityunjay kumar rai
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[25 Aug 2009 08:52 AM]

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