आदाब अर्ज है !
उसने दी जिन्दगी तो जी मैंने ! उसने लिखा पी, तो पी मैंने !! गर मैं ना पीता तो , उसका लिखा ग़लत ना हो जाता ! उसके लिखे को निभाया , क्या खता की मैंने ?...
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दीपक "तिवारी साहब"
जिन्दगी
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[22 Aug 2008 01:30 AM]



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