राग दीपक उवाच

राग-दीपक पूर्णिमा की रात में चाँद बदल जाते हैं ! वक्त के साथ वफादार बदल जाते हैं !! सोचता हूँ तेरी याद में वक्त बरबाद ना करूँ ! पर सोचते सोचते कमबख्त विचार बदल जाते हैं !! ********************************************** एक बदसूरत खातून से एक लफंगा बोला ! क्या... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक "तिवारी साहब"

लफंगा

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[24 Aug 2008 05:14 AM]

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