मर रही हैं संवेदनाएं

Shreekant Parashar बहुत से लोग अपने वृध्द माता-पिता, दादा-दादी को पुराने फर्नीचर की तरह समझने लगे हैं। दिल्ली की एक घटना से अपनी बात शुरु करता हूं। एक बूढ़ी मां को दिल्ली के एक गुरुद्वारे में इसलिए शरण लेनी पड़ी क्योंकि उस बूढ़ी मां को उसके अपने बेटे ने जंगल में छोड़ दिया।... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीकांत पाराशर
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[07 Sep 2008 13:08 PM]

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