संकीर्ण सोच
आदमी भी अद्भुत जीव है। प्रभु ने इतनी विशाल सृष्टि की और एक प्रमुख काम किया कि मनुष्यों में वैचारिक भिन्नता के बीज बो दिए। बस, इसके बाद बाकी काम अपने आप हो गए। अपने चारों ओर देखिए, जो भी विसंगतियां दिखाई देंगी वे सब मनुष्य जाति में वैचारिक भिन्नता के...
[पूरी पोस्ट]
श्रीकांत पाराशर
9
0
0
0
0
[20 Oct 2008 14:26 PM]



Shuffle








