उल्लुओं का ठाठ

Shreekant Parashar दीपावली आ गई है। पिछले वर्ष भी आई थी। न जाने कितने वर्षों से आ रही है। दीपावली आने का समय होता है तो कई दिनों पहले से ही खुसर-फुसर शुरू हो जाती है। माहौल से लगने लगता है कि दीपावली बस अब निकट ही है। लक्ष्मी के स्वागत के लिए लोग तैयार होने लगते हैं। ह... [पूरी पोस्ट]
writer श्रीकांत पाराशर
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[28 Oct 2008 02:08 AM]

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