बिल्लियाँ

KISHORE CHOUDHARY विशाखा, नौजवान लड़कियों के सामने काले अंधेरे दिनों के बारे में सोचती है। महीनों बाद कोई ट्रक घर के आगे आके रुकता है, बच्चे खुशियों से भरे दौड़ते हैं अपने पिता के गले में बाहें डालने को आतुर। ट्रक की सीट से टिकी रहने वाली पीठ, कांडला पोर्ट पर बोरियां... [पूरी पोस्ट]
writer Kishore Choudhary

दिल-ए-नाकाम

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[20 Sep 2009 14:54 PM]

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