बस यादें रह जाती हैं

चलते-चलते पिछ्ले दिनों मेरी नानी का स्वर्गवास हो गया और उसके लगभग तीन महीने के बाद नाना जी भी चल बसे।न जाने कितनी यादें अपनी आखों में समेटे नानी गॉव चल पडा (मैं अक्सर "नानी गॉव" ही कहता हूं).याद आते हैं आज भी नाना जी के साथ बिताये गये क्षण जिसमे वे किस्से सुना... [पूरी पोस्ट]
writer राहुल सि‍द्धार्थ
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[01 Nov 2008 04:07 AM]

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