बढ़्ते फासले...(कविता)
ऐसा ही तो कहा था कि बस अभी-अभी आता हूं मम्मी-पापा से लेकिन न जाने 'अभी-अभी' ने कितना फासला बना दिया कि वो जो सफर शुरू किया था खत्म होने का नाम ही नहीं लेता बार-बार पीछे की ओर लौटना चाहता हूं, और सोचता हूं कि खिलौने में भरी चाबी की तरह यह फासला भी खत्...
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राहुल सिद्धार्थ
यादें
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[15 Nov 2008 12:52 PM]



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