मस्तमौला (कविता)
वो तो हमेशा से वैसे ही रहे हैं बेफिक्र,मस्तमौला, समय के बदलते पल ने उन्हें कभी नहीं बदला चाहे वसंत हो,सर्दी हो या गर्मी मानो वही समय के बदलते हरेक पल को मुँह चिढ़ा रहे हों कि देखो तुम्हारे बदलने से, हम जैसों की दुनिया नहीं बदलती जो अर्धनग्न,बिना किसी...
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राहुल सिद्धार्थ
समय सरगम
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[16 Nov 2008 03:02 AM]



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