डरिएगा नहीं...
सड़क पर पड़ी लाश को देखकर; कोई तो रूक जाता है, उस गरीब बेसहारा औरत को; कोई तो खाना खिलाता है, अंदर से जमा हो रहे फॉर्म को देखकर; कोई तो चिल्लाता है, मैं ऐसे काम नहीं कर सकता; कोई तो जा’के’ बताता है, उसकी नौकरी चली जाएगी अगर.... कोई तो कुछ बातें छिपात...
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शिवेंद्र
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[12 Nov 2008 12:21 PM]



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