प्रगति मैदान...काहे की प्रगति?
कई बरस पहले की बात है इंडिया टुडे ने “ये भदेस भारतीय” की कवर स्टोरी के साथ एक अंक प्रकाशित किया था। जहां तक मुझे याद है काफी आलोचना हुई थी, उस अंक की...आलोचना की वजह बड़ी साफ थी कि हम भारत को आगे ले जाने की बजाए खुद ही उसकी कमियां गिनाने पर अमादा हैं...
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शिवेंद्र
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[24 Dec 2008 06:04 AM]



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