आओ साथ चले
कोई मिलता है तो मेरा पता पूछता है, कुछ इस अंदाज में खुद को आपसे रूबरू कराने की गुस्ताखी कर रहा हूं। पिछले पंद्रह सालों से खेल की रिपोट्रिंग कर रहा है यह बंदा, बस एक कोशिश हमेशा की है कि जीविकापाजॆन से इतर भी खिलाडियों के लिए कुछ किया जाए, खासकर उन प्...
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यशपाल सिंह
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[03 May 2008 02:12 AM]



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