वह सूरज था .............................दिनकर.
आज २३ सितम्बर २००८.ठीक सौ साल पहले हिन्दी का दिनकर उगा था। कभी हुँकार करता कभी वीरता, त्याग, साहस, पौरुष और दान को ही नहीं ,जीवन के संज्ञान के नैतिक आधार को अमरत्व देते महादान के महा रथी की रश्मियाँ बिखेरता कभी चतुरंग संस्कृति के अध्याय लिखता तो कभी...
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RAJ SINH
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[22 Sep 2008 19:34 PM]



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