कौन हो तुम ??

RAJ SINHasan....... say कौन हो तुम ? तुम ! या हो सकते हो । मेरे भाग्य लेख पर लिखी सुन्दरतम कविता........... संक्षिप्त , अधूरी .........किंतु स्वयम में एक तृप्ति ! जैसे ?........चिर आकंछित कल्पित स्वप्न का अभिसार! कभी न ख़त्म होने वाले सुखद महा काव्य की , पहली पंक्ति का सम्प... [पूरी पोस्ट]
writer RAJ SINH
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[03 Jan 2009 04:02 AM]

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