सत्य !

RAJ SINHasan....... say जैसा मन वैसी वाणी , जैसी वाणी वैसी क्रिया । सद्विवेकी सत्यशीलता मन , वचन और कर्म में एकरूप होती है । ....................सुभाषित । सत्यम ब्रूयात ,प्रियम ब्रूयात ,न ब्रूयात अप्रियम सत्यम । .................... . सुभाषित। सत्य वह नहीं है जिसमे हिंसा भर... [पूरी पोस्ट]
writer RAJ SINH
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[28 Mar 2009 18:50 PM]

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