भारती अभिधा की तीन कवितायें

.कलम स्पर्श वासना से दग्ध हाथों ने छुआ जिस पल मोम सी अहिल्या पत्थर हुयी उसी पल स्नेहसिक्त एक स्पर्श राम का फूंक गया पाषाण देह समझती है अन्तर स्पर्श का... स्वप्न बाँध पोटली स्वप्नों की रख लेती हूँ तकिये के नीचे और सो जाती हूँ हर सुबह काजल के साथ डाल लेती ह... [पूरी पोस्ट]
writer कलम
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[14 May 2008 03:44 AM]

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