शे'र ही पूरी करेंगे मेरी हर इक बात अब तो

जज़्बात-दिल से इन रदीफों काफिया में बंध गए जज़्बात अब तो शे'र ही पूरी करेंगे मेरी हर एक बात अब तो हमने आज़ादी बड़ी मुश्किल से पाई है यहाँ बढ़ रहे हैं फिर गुलामी की तरफ़ हालात अब तो देखकर हालत वतन की दिल तड़प उठता है अब पर यकीं है जल्द ही बदलेंगे ये हालात अब तो खेत सूखे... [पूरी पोस्ट]
writer अखिलेश सोनी

ग़ज़ल

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[22 Dec 2009 06:30 AM]

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