इक दिन तुमको आना ही है
इक दिन तुमको आना ही है आज नहीं तो कल फिर क्यों तडपाती हो तुम मुझको पल-पल जिंदगी से हूँ परेशाँ बहुत सताती तेरी सौत तुझे पुकारें मेरी बाहें अब तो आ जा प्यारी मौत...
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अखिलेश सोनी
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[22 Dec 2009 06:29 AM]



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