भ्रष्टाचार

जज़्बात-दिल से फैल रहा है देश में कैसा भ्रष्टाचार देख रहे हैं सब खड़े बेबस और लाचार बेबस और लाचार अगर कोई न चेता खा जायेंगे बेच इसे आगे ये नेता कैसी त्रासदी देश हमारा झेल रहा है भ्रष्टाचार बन ज़हर रगों में फैल रहा है... [पूरी पोस्ट]
writer अखिलेश सोनी

कुण्डलिया

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[22 Dec 2009 06:28 AM]

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