ग़ज़ल
आप से ज़्यादा हसीं हैं ये अदाएं आपकी रोक देती हैं क़दम मेरे सदायें आपकी लम्हा लम्हा बढती जाती है मोहब्बत आपसे अब तो ये दिल हमारा मिलकियत है आपकी न किया इकरार अब तक आपने इस राज़ का दस्ताने दिल बताती हैं निगाहें आपकी यूँ तो सताना आपकी फितरत में शामिल ह...
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अखिलेश सोनी
ग़ज़ल
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[22 Dec 2009 06:26 AM]



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