कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?...

जज़्बात-दिल से ये समय नहीं हैं आँख बंद कर सोने का ये समय नहीं हैं वक्त को ऐसे खोने का चलो बदल दो देश की हालत आगे आओ ये समय नहीं हैं नेताओं को ढ़ोने का वरना तुम घनघोर निराशा देखोगे ?... कब तलक चुपचाप तमाशा देखोगे ?... कह विकास का सर्वनाश यह करते आए भारत माँ का मान सद... [पूरी पोस्ट]
writer अखिलेश सोनी
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[22 Dec 2009 06:26 AM]

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