मिलाने वाली...

कुछ कहना है... घर से दफ्तर.. दफ्तर से घर.. किताबों और टीवी से ऊब चुका हूँ... राजीव से बात नहीं हो पाई है.. संजय से कब मिला था... याद नहीं राकेश की भी कोई ख़बर नहीं... कभी-कभी सोचता हूँ... मैंने पीना क्यों छोड़ दिया ?... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक वशिष्ठ

सच्ची बात

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[10 Dec 2008 21:40 PM]

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